चीन कोई भी उत्पाद/चीज या एप असली नहीं बनाता। उनका हर उत्पाद या एप किसी न किसी पूर्व प्रचलित उत्पाद का नकल होता है। नकल करने मे वे बेजोड़ हैं और अपनी सारी अकल इसी मे लगाते हैं। सबसे पहले वे किसी देश में प्रचलित लोकप्रिय उत्पाद के लिए सर्वे करते हैं। पता लगाते हैं कि कौन सा एप या उत्पाद लोगों के बीच अत्यधिक प्रचलित है और आगे उसका क्या स्कोप है। उसके माध्यम से लोगों की सूचनाएं एकत्र करने और चुराने की क्या संभावनाएं हैं? जैसे कीबोर्ड एप जिसमे समस्त टंकित सामग्री को पढ़ने और संग्रहीत करने की कानूनी सहूलियत होती है। स्कैनर एप, सेल्फी और मेकअप एप आदि इसी श्रेणी में आते हैं।
सन 2014 मे भारत का एक स्टार्ट अप एप 'शेयर चैट' लोगों के बीच बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रहा था।
चीन के एप निर्माताओं ने भारतीय बाजार का सर्वेक्षण किया और 'शेयर चैट' की खूबियों, खामियों व अग्रिम संभावनाओं का अध्ययन किया। फिर सन 2015 में उसके मूल कांसेप्ट मे कुछ और फीचर जोड़ कर एक नया एप टिकटाक लांच किया।
इसका बहुत तगड़े से विज्ञापन किया और इसमे बहुत बड़ा निवेश किया। इस तरह से इनका टिकटाक हमारे उभरते शेयरचैट को पछाड़ता हुआ तेजी से लोकप्रिय होता गया और हमारा स्टार्ट अप कहीं खो गया। इस तरह शेयर चैट के पूरे मार्केट को चीनी टिकटाक ने रणनीति के तहत हथिया लिया। उसी समय हमारा स्वदेशी 'म्यूजिकली' नामक एप भी कुछ उन्हीं खूबियों के साथ भारतीय और विश्व बाजार में छाता जा रहा था। यह एप चीनी टिकटाक के लिए कड़ा प्रतिस्पर्धी साबित हो सकता था। अतः टिकटाक ओनर चीनी 'बाइटडांस' ने म्यूजिकली को खरीदकर उसे टिकटाक मे मर्ज कर लिया। इस तरह चीन 'लघु चलचित्र शेयरिंग' या 'शार्ट वीडियो शेयरिंग' आधारित सोशल मीडिया का एकछत्र बादशाह बन गया। अब इस एप के माध्यम से चीनी निर्माता एप उपयोग कर्ताओं की निजी जानकारियां, (विज्ञापन के लिए डाटा कलेक्शन पालिसी के तहत) रुचियां और भी बहुत कुछ एकत्र करके उनका अध्ययन करते हैं कि किस सूचना या सामग्री पर उस देश के लोग कैसी प्रतिक्रिया देते हैं। इन जानकारियों का उपयोग कई तरह से किया जा सकता है, दंगा फसाद कराने के लिए भी। टिकटाक द्वारा हमारे देश मे कुछ एकाउंट द्वारा रेप को उकसाने /बढ़ावा देने वाली और एसिड अटैक को प्रोत्साहित करने वाले वीडियो बनाने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई न करना इसका प्रमुख उदाहरण है। शायद बाद में कानूनी समस्या से बचने के लिए उनको हटा दिया था। कुछ समाचार चैनलों और स्रोतों के अनुसार अमेरिका दंगों में चीनी टिकटाक की भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। तब तो मुझे भारत के दिल्ली दंगों मे भी इस सोशल मीडिया पर संदेह होता है। क्योंकि ऐसी कई आपत्तिजनक टिकटाक वीडियो ट्विटर और व्हाट्सअप /फेसबुक पर देखने को मिल रही थीं। जिनमे इस्लामिक कट्टरपंथी काफिरों की लाशें बिछाने वाला कोई गाना गा रहे थे।
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